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गजल

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

June 3, 2017

जो जन्म से अंधा है वो देखना क्या जाने
जो दिल से बेबफा है वो बफा क्या जाने

जो छोड़कर चले जाते है बिन बताये सफर में
असल मे हमसफ़र क्या होता है वो क्या जाने

हर बात पर जो जहर उगलते है इंसान यहाँ
वो कालिया नागों से दुश्मनी करना क्या जाने

जिसे जिश्म रूह सासो जज्बातों में बसाया है
भला उस दिल से हम बगावत करना क्या जाने

हर रोज वोटों के भूखों ने लोगो को जलाया है
जनाब शियासत है ये,इंसानियत को क्या जाने

जिन्होंने मोहबत में भी दूरिया बरती थी हमसे
आज जफ़ाओं में हाल चाल पूछना क्या जाने

उसे तो मोहबत में भी मिलने का शौक़ नही था
आज नफरत है तो वो मुझसे मिलना क्या जाने

उस सुर्ख गुलाब की खातिर जिंदा है ऋषभ
तो गुलाब को डाली से तोड़ना वो क्या जाने

Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है
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