.
Skip to content

** गजल **

पूनम झा

पूनम झा

गज़ल/गीतिका

April 18, 2017

कहते थे अपना पर, कहो क्यूं अब मैं बेगानी हो गई।
जो कसमें खायी थी तुमने, वो सारी बेमानी हो गई ।
*
बड़ी सिद्दत से निभायी है , जिस रिश्ते को हमने
आज तो लगता यही है जैसे मेरी ही कुर्बानी हो गई।
*
बेवजह अपने दिल पर किया हमने जुल्मों सितम
चोट खाए जख्म हरे हैं,कैसे कहूं बातें पुरानी हो गई।
*
सोचा दर्द दिल की, एक कहानी ही लिख दूँ पर
जिनको लिखना था वो सब बातें जुबानी हो गई ।
*
जिंदगी के सफर में कई मोड़ से गुजरी है ” पूनम ”
आह निकलती है दिल से कैसे कहूं मेहरबानी हो गई।
@पूनम झा
कोटा राजस्थान

Author
पूनम झा
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है।... Read more
Recommended Posts
दो दिलो को जुदा कर गई,कॉम की ये कई बंदिशे
तेरी यादों में खोये हुये,शाम से फिर सुबह हो गई मुझको छत पर ही बैठे हुये आज फिर रात भर हो गई लोग आते रहे... Read more
बस ग़ज़ल उनकी निशानी रह गई
ग़ज़ल ---------- ?? और गुल की तो कहानी रह गई बस चमन में रात रानी रह गई ?? दिल में छवि कोई पुरानी रह गई... Read more
गज़ल
ऐक शाम हॅसी अजनबी हो गई, सांस मेरी भी अनकही हो गई जो चहेरे थे अभी है कहां, जिन की परछाई प्यारी हो गई। हम... Read more
रब की मुझपर मेहर हो गई
रब की मुझपर मेहर हो गई जिंदगी मेरी बेहतर हो गई उन्हें देखते रहे भर नजर शब हुई और सहर हो गई आ गई वो... Read more