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गजल

Neelam Naveen

Neelam Naveen "Neel"

गज़ल/गीतिका

February 16, 2017

वक्त के सितम यूँ सिलसिलों से, गुजरते चले गये !
बेख्याली में यूहीं हम,तेरा इंतजार करते चले गये !!

मेरे शहर की हवा भी कुछ,बदली हुई हैं आज !
तेरे एहसास के झोंके मुझ तक,ठहरते चले गये !!

इल्म नही अब सबका,होना हो मेरे भी आसपास!
धुंध से धुंधलाये तुम,हम खुद में सिमटते चले गये !!

सहेज कर तुमको तिजारत सा,मन के मकां में कहीं!
तुमने ईबारत बन आईने दिखाये,हम डूबते चले गये !!

टुटती सपनों की ईमारतें,बोलो ना कैसे यकींन न करें !
जगे नींद में जैसे हम,अधूरे से गुम होते चले गये!!

हौसलों को सलाम तेरे,हिचकियों को ओढ कर सोया!
पल पल तुझमें “नील”कई शहर खामोश होते चले गये !!

नीलम नवीन नील
देहरादून 15/1/17

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Author
Neelam Naveen
शिक्षा : पोस्ट ग्रेजूऐट अंग्रेजी साहित्य तथा सोसियल वर्क में । कृति: सांझा संकलन (काव्य रचनाएँ ),अखंड भारत पत्रिका (काव्य रचनाएँ एवं लेख ) तथा अन्य पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । स्थान : अल्मोडा

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