.
Skip to content

गजल

Vandaana Goyal

Vandaana Goyal

गज़ल/गीतिका

January 7, 2017

बहर १२२२ १२२२ १२२२ १२२२
काफिया ई
रदीफ मालूम होती है
गजल
नदी बरसो यहॉ कोई बही मालूम होती है
सुनी थी जो कहानी, अब सही मालूम होती है

है जिंदा खुशबुएँ अब तलक दीवारो मे महलो की
मिरी जॉ ,वो यहॉ सदियो रही मालूम होती है

बिठा लाकर कभी उसको भी पहलू मे खुशबुऔ की
ये रंजो गम की दीवारे ढही मालूम होती है

कहा किसने, दिलो को तोड तू ,छिपके चली जा अब
जहॉ देखूँ वही मुझको खडी मालूम होती है

पली नाजो,हँसी रातो,खिली फूलो सी वो बेटी
मुझे तो कोई खुबसूरत परी मालूम होती है

गिरा अश्कों को यों ना वंदना पलको से रातोदिन
हँसी अनमोल मोती की लडी मालूम होती है
वंदना मोदी गोयल

Author
Vandaana Goyal
बंदना मोदी गोयल प्रकाशित उपन्यास हिमखंड छठा पूत सांझा काव्य संग्रह,कथा संग्रह राष्टीय पञ पत्रिकाओं में कविता कथा कहानी लेखों प्रकाशन मंच पर काव्य प्रस्तुति निवास फरीदाबाद
Recommended Posts
मुझे क्यूँ तीरगी में रौशनी मालूम होती है
चले तू जब तो बलखाती नदी मालूम होती है मुझे फिर जाने जाँ क्यूँ तिश्नगी मालूम होती है तू मेरे सिम्त जब भी आ रही... Read more
ग़ज़ल ( मम्मी तुमको क्या मालूम )
ग़ज़ल ( मम्मी तुमको क्या मालूम ) सुबह सुबह अफ़रा तफ़री में फ़ास्ट फ़ूड दे देती माँ तुम टीचर क्या क्या देती ताने , मम्मी... Read more
ग़ज़ल रचनाएँ
बुरे हालात में सबंध अच्छा टूट जाता है,,,,,, गरीबी में यहाँ लडकी का रिश्ता टूट जाता है ।।।। नई इस कौम को देखो जरा समझा... Read more
ग़ज़ल/गीतिका
मापनी : १२२२ १२२२ १२२२ रदीफ़ - है , काफिया -आना उमंगों की तरंगे यूँ छुपाना है विरह में गीत यूँ अब गुन गुनाना है... Read more