Reading time: 1 minute

गजल

गजल
************
बहुत रोकते हैं नहीँ रोके रुकती,
ये घटना पै घटना घटी जा रही है।

यहाँ आश बदली बरसने के पहले,
मिनट दर मिनट में छटी जा रही है ।

जतन से तो ओढ़ी है जीवन चदरिया,
संभाले संभाले फटी जा रही है ।

बनाई है दूरी नहीं मिलना हमको ,
वो निर्लज्ज आकर सटी जा रही है ।

उसे प्यारा पैसा प्रतिष्ठा न दिखती,
पटाये बिना ही पटी जा रही है।

खुदी खुद की देखो हमारी न पूछो,
जरा सी बची है कटी जा रही है ।

नहीं दुख में सुधि ली बनी थी जो उन पर,
वही आस्था अब हटी जा रही है ।

फंसे लाक डाउन गुरू ले न पाये,
मिठाई बंगाली बटी जा रही है।

गुरू सक्सेना
नरसिंहपुर मध्यप्रदेश

2 Likes · 1 Comment · 27 Views
Copy link to share
guru saxena
113 Posts · 10.7k Views
Follow 4 Followers
You may also like: