कविता · Reading time: 1 minute

??◆उसके दर पर जो आया◆??

अ मालिक तेरी दया,हमपर ज़रा-सी हो जाए।
हो उजाला ज्ञान का,ग़म का अँधेरा खो जाए।।

सहमे-सहमे से हैं हम,थके-थके-से हैं क़दम।
ग़म की घटाएँ हैं छाईं,मंज़िल कहीं न खो जाए।।

दिखा तू रस्ता ज्ञान का,रहे भरोसा ध्यान का।
नेकियों के पथ पर चलें,जीवन सफल हो जाए।।

सामने सदा फर्ज़ रहे,देश का हमपे न कर्ज़ रहे।
हौंसला हो दिल में यही,हर मुसीबत खो जाए।।

हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई हैं सब भाई-भाई।
कभी किसी में वैर न हो,प्यार सभी में हो जाए।।

फल की आशा छोड़के,कर्मों में बस ध्यान रहे।
जैसा किया वैसा मिलेगा,दिल में तसल्ली हो जाए।

“प्रीतम”तेरी प्रीत का,है उसको भी ध्यान सदा।
उसके दर पर जो आया,खाली कभी न वो जाए।।

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राधेयश्याम बंगालिया….
……………..प्रीतम..
……………….कृत.
सर्वाधिकार…………….सुरक्षित

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