?? हिना रंग लाती है सूख जाने के बाद??

सोना जेवर बनता है अग्नि में तप जाने के बाद।
इंसान संभलता है ज़िन्दगी में ठोकर खाने के बाद।।

हथेली पर सरसों कभी हरी नहीं होती मेरे,दोस्त! रंग लाती है हिना भी सूख जाने के बाद।।

मुझे कभी दर्द का अहसास ही नहीं हुआ था!
बहुत रोया पर तन्हाई मैं तेरे दूर जाने के बाद।।

कभी न समझा मैं धोखेबाजी का रंज क्या है।
आज समझा हूँ अपनों से सज़ा पाने के बाद।।

बग़ल में छूरी मुँह में राम-राम रखते हैं लोग रे!
ये समझा हूँ मैं दोस्तों से ही धोखा खाने के बाद।।

इस अविश्वास भरे दौर में विश्वास खोजने चला था।
अपना ही आया नमक झिड़कने ज़ख्म खाने के बाद।।

“प्रीतम”कामयाबी में यहाँ दाद तो सभी देते हैं रे!
कोई हौंसला नहीं देता है क़दम लड़खड़ाने के बाद।।

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