कविता · Reading time: 1 minute

??◆ यारी यार की◆??

याराना यार का मौसम ये बहार का।
फूले-फले दोस्ती मिले सुख प्यार का।।

यार तोहफ़ा है ये क़िस्मत से मिलता।
दीप उजाला बनता जैसे घर-बार का।।

यारी खज़ाना है कुबेर से बड़ा दोस्त।
जिसे मिला सीखे गुण वो एतबार का।।

वक्त बदले पर यार नहीं बदले अगर।
यार वही है एक सुनिए व्यवहार का।।

दूर रहे पर मिलने की ख़्वाहिश करे।
दीया जले नयन यार के दीदार का।।

कृष्ण-सुदामा का उदाहरण हृदय-पले।
गम कोसों दूर रहेगा हयाते-भार का।।

दिल खिले जब भी मिले दिल दिलसे।
भरदे दिल दिल में सार सब शृंगार का।।

एक-दूसरे का सुख-दुख अपना समझे।
मिले उजाला जीवन में तब संसार का।।

फूल-ख़ुशबू सरिस मिलजुल रहें हम यहाँ।
चमन बने संसार फिर परवर-दिगार का।।

“प्रीतम”तेरी ये प्रीत सादगी की मूरत है।
करे रंगो-बू-सा असर किसी गुलज़ार का।।
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राधेयश्याम….बंगालिया….प्रीतम….कृत

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