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?? बात पते की??

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कविता

January 27, 2017

हर चीज़ की क़ीमत यहाँ,क्यों दुनिया भूल जाती है।
बंद पड़ी घड़ी भी,दिन में सही दो समय बताती है।।

कमियां निकाले उसकी,मिसाल मख्खी से दूँगा।
ख़ूबसूरत ज़िस्म छोड़,वो ज़ख्म पे बैठ जाती है।।

पास में हो चीज़ हमारे,उसकी कदर नहीं करते हम।
साथ छूट जाने पर,उसकी क़ीमत समझ आती है।।

संघर्ष में जिसने साथ दिया,सच्चा मीत वही जीवन में।
कामयाबी मिलने पर तो,सारी दुनिया साथ हो जाती है।।

सही नज़र से देखो तुम,दुनिया हसीन नज़र आएगी।
भीगी पलकों से आइने में,सूरत धुंधली हो जाती है।।

बोल बड़े कभी न बोलो,समय की लाठी ताक़तवर है।
जिसदिन पड़ती ये भैया,खुद से नफ़रत हो जाती है।।

चारदिन की जिंदगी है,हँसकर गुज़ारो तुम यारो।
घुट-घुट कर जीने से ये,नरक-सी हो जाती है।।

भेदभाव की दीवारों में,इंसानियत को न भूलो यारो।
इन कर्मों को देखके तो,क़ुदरत भी रूठ जाती है।।

हर रात के बाद मेरे दोस्तों!सुबह भी तो होती है।
ग़म से न हारो कभी,पीछे ख़ुशियों की बारात आती है।।

“प्रीतम”तेरे विचार ग़ज़ब है,काश!दुनिया के हो जाएं।
ऐसे पावन विचारों में तो,दुनिया स्वर्ग नज़र आती है।।

दुनिया से लिए कुछ विचारों को मैंने तो केवल कलमबद्ध करने का तुच्छ-सा प्रयास किया है।
आप पाठक वर्ग को प्रयास अच्छा लगे तो टिप्पणी अवश्य करना।

आपका हितैषी–राधेश्याम “प्रीतम”
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