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गगन में टूटता तारा दिखा है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

July 25, 2016

गगन में टूटता तारा दिखा है
किसी की आस का दीपक जला है

महक कर नाचता ये डालियों पर
हवा ने फूल से क्या कह दिया है

लगा है नाचने अब मोर मन का
घिरी फिर सावनी देखो घटा है

बदलता वक़्त रहता चाल अपनी
तभी तो ज़िन्दगी कहते जुआ है

चला जाता अमावस सौंप इसको
हमेशा चाँद ही कब रात का है

गया है टूट इतना ‘अर्चना’ दिल
कि लेना साँस भी लगती सजा है

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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