मुक्तक · Reading time: 1 minute

गगन पार

गगन के पार है जिनका ठिकाना
अछूती यह धरा दिल शामियाना
इस लोक से उस लोक जाते जो
वही पूर्वज दे सबको आशियाना

5 Likes · 2 Comments · 53 Views
Like
You may also like:
Loading...