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ख्वाब

बसंत कुमार शर्मा

बसंत कुमार शर्मा

गज़ल/गीतिका

February 15, 2017

नहीं आज बचपन जवानी नहीं है
मगर खत्म अपनी कहानी नहीं है

भरा प्रेम से दिल लबालब है मेरा
किसी के लिए बदगुमानी नहीं है

कहाँ से मिलेंगे किसी को निवाले
मेरे गाँव खेती- किसानी नहीं है

मेरे दिल ने सीखा तुम्हीं से धड़कना
तुम्हारे बिना जिंदगानी नहीं है

किया तुमसे’ वादा नहीं है चुनावी
किसी किस्म की बेईमानी नहीं है

इसी जन्म में तुमको पाकर रहूँगा
मेरा ख्वाब ये आसमानी नहीं है

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Author
बसंत कुमार शर्मा
भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन प्रबंधक के पद पर कार्यरत, गीत, गजल/गीतिका, दोहे, लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन
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