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ख्वाब शशि के

विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव

गज़ल/गीतिका

February 19, 2017

बेशर्म की कलम से

ख्वाब शशि के

कहने को अपवाद रहा हूँ।
पर आंसू सा रोज बहा हूँ।।

अंधियारी जीवन रजनी में।
ख्वाब शशि के देख रहा हूँ।।

कितनी बार मिटाया खुद को।
पूछ ना कितनी बार ढहा हूँ।।

रहा अनसुना यूँ जीवन भर।
गया मैं कितनी बार कहा हूँ।।

दुनिया समझे मुझे “बेशरम”।
हर नहले पर पड़ा दहा हूँ।।

विजय बेशर्म
गाडरवारा 9424750038

Author
विजय कुमार नामदेव
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
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