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ख्वाब अभी बाकी है…

ख्वाब अभी बाकी है…

ख्वाब अभी बाकी है…
जिंदगी ढलने को करीब है,
पर ख्वाब अभी बाकी है,
हसरतों से भरी जिंदगी में,
द्वंद अभी बाकी है…
जीवन क्षितिज से बस,
दो पड़ाव दूर है_
जिंदगी का आखिरी सफर ।
फिर भी आश अभी बाकी है…
दे रही नित कौन नयी उर्जा,
कहना मुमकिन नहीं,
पर झंझावातों को चीर कर,
आगे निकलने की तमन्ना,
अभी बाकी है…
इस अन्याय घुटन के बुरे दौर में,
अपनी लेखनी को विराम दूँ कैसे,
जब तलक सीने में साँस है
कलम की अपनी चाहत जो बाकी है…
मिट गया जो इस जहाँ से,
नामोनिशान तन का।
मेरी रूह भी आवाज बनकर गुनगुनाएगी,
सबके सोये अरमाँ जगाने के लिए,
बदलाव की ये आरजू जो बाकी है…

ख्वाब अभी बाकी है…

मौलिक एवं स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
© ® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि -२० /०९/२०२१
मोबाइल न. – 8757227201

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मनोज कुमार "कर्ण" "क्यों नहीं मैं जान पाया,काल की मंथर गति ? क्यों नहीं मैं समझ पाया,साकार की अंतर्वृत्ति ? मोह अब कर लो किनारा,जिंदगी अब गायेगी । सत्य खातिर…
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