.
Skip to content

ख्वाबों को पलने दो

Vandaana Goyal

Vandaana Goyal

कविता

January 9, 2017

published in buisness sandesh august edition

ख्बाबों को पलने दो……

वंदना गोयल
क्या बुरा किया था निगाहों ने

जो देख लिया था उनको ख्बाबों में….

बस इतना गुनाह हो गया उनसे कि

गिरने न दिया उनको अश्को की तरह।

वो ख्बाब भी क्या था बस……

इक तडप थी उनको छू लेने की.

इक चाह थी कि……….

आसमां की छत हो सर पर

इक चाह थी कि………

पाॅव के नीचे जमीं आ जायें।

इक चाह थी कि…………..

आॅख में आॅसू ख़ुशी के हो

इक चाह थी कि………….

होठों पे मुठठी भर हसीं आ जायें।

इक चाह थी कि………

बाहों में आसमां हो थोडा सा

इक चाह थी कि…….

निगाहों से पता मंझिल का पा जाये।

इक चाह थी कि………..

खुद को पहचानने लगे

इक चाह थी कि……..

खुद को थोडा सा जान जाये।

इक चाह थी कि……..

पाॅव में अपने भी हो पायल बंधी

इक चाह थी कि……

इन कदमो ंसे जमाना लाँघ जाये।

इक चाह थी कि…….

दर्द को गिरा दूॅ अश्को की तरह

इक चाह थी कि……..

प्यार उसका सीने में छिपा लाये।

इक चाह थी कि…

उसके हो जाये बस

इक चाह थी कि………

उसको अपना बना लायें।

कया बुरा किया निगाहों ने

गर देख लिया इक ख्बाब.

ख्बाब …

कि……ख्बाबो को पलने दो निगाहो ंमें

ख्बाब जीने को सबब बनते है।

हाथो ंसे छूटने न दो इनको कि

ये जख्मों को सीने का सबब बनते है।

क्या बूरा किया निगाहो ंने…..

गर देख लिया इक ख्बाब।

Author
Vandaana Goyal
बंदना मोदी गोयल प्रकाशित उपन्यास हिमखंड छठा पूत सांझा काव्य संग्रह,कथा संग्रह राष्टीय पञ पत्रिकाओं में कविता कथा कहानी लेखों प्रकाशन मंच पर काव्य प्रस्तुति निवास फरीदाबाद
Recommended Posts
इक दफा आजमाइये
शहीदों के लिये इक दीपक जलाइये पर्यावरण के लिये इक पौधा लगाइये *************************** हो जायेगी आपकी आत्मा भी प्रसन्न बस इक दफा तो ये नुस्ख़ा... Read more
कुछ उनके लिए
NIRA Rani कविता Aug 22, 2016
कुछ उनके लिये...⊙ फिर इक बार... मैं कहूं गी तुझसे... मैं दूर ही सही... पर रहूंगी तुझमें ॥ जज़बात में... ख़्यालात में... बिखरे हुए लम्हात... Read more
शाम को तो सूरज डूबना चाह रहा है
शाम को तो सूरज डूबना चाह रहा है चाँद आसमां को चूमना चाह रहा है।। देश सेवा का आया अवसर होड़ लगी कहाँ कोई मौका... Read more
नई पहल
शहीदों के लिये इक दीपक जलाइये पर्यावरण के लिये इक पौधा लगाइये *************************** हो जायेगी आपकी आत्मा भी प्रसन्न बस इक दफा तो ये नुख्सा... Read more