ख्वाबों को तोड़ कर उसका घर बनाता हूँ

मैं अपने ख्वाबों को तोड़ कर उसका घर बनाता हूँ
वो रूठ जाती है उसे अक्सर मनाता हूँ
नींद उड़ाने वाले चंद सपने अक्सर
सपने ही रह जाते है
वादा करने वाले हमराही जब राह छोड़ जाते है

मात्र रातें ही तो मिलने का सहारा रह जाती है
जब जब मरने का उपहार ख़ुशी ख़ुशी दे जाती है

प्रेम की मंडी में झूठे शब्दों का बाज़ार ही तो सजता है
जो समय की बहती धारा में बहता फिरता है

एक डाली के पंछी जब दूसरे दरख्तों
की डाली में आशियाँ बना लेते है
जीने,मरने के सारे वादे जुमले जैसे लगते है ।

भूपेंद्र रावत
4।04।2020

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