खेल बिगड़ जाता है ...

पल में खेल बिगड़ जाता है ….
हो सकते थे कभी जो पूरे ।
रह जाते हैं स्वप्न अधूरे ।।
फूलों के खिलने से पहले,
निष्ठुर पाला पड़ जाता है ।
पल में खेल बिगड़ जाता है….
गतिमयता से ही है जीवन ।
जड़ता मृत्यु का आलिंगन ।।
बहता पानी रुक जाए तो ,
चंद दिनों में सड़ जाता है ।
पल में खेल बिगड़ जाता है ….
विपदा में न धीरज त्यागे ।
संघर्षों को देख न भागे ।।
युक्तिहीन पतंग जले जो ,
दीपक लौ से लड़ जाता है।
पल में खेल बिगड़ जाता है ….

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