Feb 25, 2017 · कविता

खूशियों के पल

जी भर के आज
वो मुस्कराया है
बाद मुद्दत के खूशियों का पल
झोली मे उसकी आया है ।

खूशियों का पैमाना
आंखों से छलक आया है
पाने को इस पल को
किस्मत ने बहुत उसे रूलाया है ।

अंधेर नही उसके द्वारे
समझ ये आज उसे आया है
खोया था जितना उसने
कहीं अधिक आज पाया है ।

खुशियों का कारवां
बसन्त बन के आया है
कांटो से उठा कर
उसे फूलों पर बैठाया है ।।

राज विग

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Working as an officer in a PSU. vigjeeva@hotmail.com
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