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“खूबसूरत जिन्दगी “

Dr.Nidhi Srivastava

Dr.Nidhi Srivastava

कविता

August 16, 2016

ख्वाहिशों के पन्ने ना पलटिये ,
सिलवटें पड़ जाती हैं ,
और उम्र गुज़र जाती है ,
मगर पूरी नहीं होती हैं ,
यादों को भी समेट दीजिये,
इन्हीं पन्नों के बीच,
परत -दर -परत,
मिलती है बडी मुश्किल से,
छोटी सी ये खूबसूरत ज़िंदगी ,
हौसलों के पंख पसारिये,
अपने आज पे न्योंछावर,
अपने कल को कर दीजिये,
अपने आने वाले कल को
अपनी आगोश में भर लीजिये.
…निधि…

Author
Dr.Nidhi Srivastava
"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"
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