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खुशियॉ

vinay pandey

vinay pandey

कविता

January 25, 2017

खुशियाँ चुनते चुनते ,
कब मैं गम चुन लिये !
अब जागू रात भर ,
आँखो में सजाये आँसु अब !
जरा सी हँसी थी ,
गम ने आकर जकड़ ही ली !
ए सागर तुम्हे भी गम हैं ,
फिर भी इतनी शान्त क्यों हैं !
कही तुफानो की आने की संदेश तो नही ,
कही दर्द में सिसकने की इंतजार तो नही !
रुको जरा खुद को सम्भाले ,
तेरी दर्द को ही सवार ले !

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Author
vinay pandey
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