Jul 8, 2016 · मुक्तक
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खुशियॉ लौट आयी हैं मिली जब चॉद-सी “जैनी”

चमकता चाँद सा चेहरा मेरे दिल में उतर आया !
हकीकत है या फिर सपनो में उससे बात कर आया !!
मिले दो पल मुझे भी इश्क़ को महसूस करने के ,
भ्रमर के रुप में जुगनू कुमुदिनी पर नजर आया !!

खुशियॉ लौट आयी हैं मिली जब चॉद-सी “जैनी” !
सुखद लगने लगा हर पल नहीं लगती है बेचैनी !!
लिए एहसास में जिसको विरह के गीत गाये थे,
वही सुंदर सलोनी खूबसूरत-सी है मृगनयनी !!

मुझे वो मिल गई कविता कहानी गीत गजलों में !
नजर आता है चेहरा फूल क्यारी और गमलों में !!
उसी के नाम का मै आजकल बस गीत गाता हूँ ,
रहेगी रानी बनकर वो सदा जुगनू के महलों में !!

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Ashish Tiwari
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