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” ——————————————खुशियां समेटे थे” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गज़ल/गीतिका

August 12, 2017

ये जो बोल बिखरें हैं , बरसों से समेटे थे !
नाग की तरह ये तो , कुंडली मारे बैठे थे !!

टूटा है भरम सबका , जान गए गहराई!
दुशाले में ये अपना , मुंह जो लपेटे थे !!

पदक यहां आसां नहीं , पद मिल ही जाते हैं !
सफलता के दामन में , खुशियां समेटे थे !!

विरासत में जो भी मिला , छिप नहीं पाता है !
गरिमा चढ़ा भेंट दी , सफलता पे ऐंठे थे !!

उम्मीदों पे उतरें खरे , पलकों पे बैठगें !
गिरे अर्श से फर्श पर , किस्मत लपेटे थे !!

सबके हैं दिन फिरते , कल की खबर किसको !
आज बेदखल हो गए , कुर्सियों पे बैठे थे !!

बृज व्यास

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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