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खुशबुओं की बस्ती

मदन मोहन सक्सेना

मदन मोहन सक्सेना

गीत

July 18, 2016

खुशबुओं की बस्ती

खुशबुओं की बस्ती में रहता प्यार मेरा है
आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है
उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है
अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है

जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है
प्यार पाया जब से उनका हमने ,लगता हर पल ही सुनहरा है
प्यार तो है सबसे परे ,ना उसका कोई चेहरा है
रहमते खुदा की जिस पर सर उसके बंधे सेहरा है

प्यार ने तो जीबन में ,हर पल खुशियों को बिखेरा है
ना जाने ये मदन ,फिर क्यों लगे प्यार पे पहरा है

खुशबुओं की बस्ती
मदन मोहन सक्सेना

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Author
मदन मोहन सक्सेना
मदन मोहन सक्सेना पिता का नाम: श्री अम्बिका प्रसाद सक्सेना संपादन :1. भारतीय सांस्कृतिक समाज पत्रिका २. परमाणु पुष्प , प्रकाशित पुस्तक:१. शब्द सम्बाद (साझा काब्य संकलन)२. कबिता अनबरत 3. मेरी प्रचलित गज़लें 4. मेरी इक्याबन गजलें मेरा फेसबुक पेज... Read more

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