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खुद से मिलने की दिल में हसरत है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

May 17, 2017

खुद से मिलने की दिल में हसरत है
पर मिली आज तक न फुरसत है

पूजा जाये भले ही धन कितना
अच्छी सेहत जहां में नेमत है

शर्म आंखों की मर गई ऐसी
अब सरे आम लुटती इज्जत है

दौर चलता बराबरी का अब
पहले जैसी नहीं मुहब्बत है

साँझ जीवन की आ गई देखो
रहती नासाज सी तबीयत है

सर चढ़ी बेइमानी है सबके
रूठी रूठी लगे शराफत है

ये सफलता भी हमको तब मिलती
साथ जब देती अपनी किस्मत है

हैं चढ़ी कितनी परतें चेहरे पर
“अर्चना’फिर भी फीकी रंगत है

डॉ अर्चना गुप्ता

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Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more

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