खुद पर एतबार रखिए

चेहरे बदल कर घूमने का है यहां चलन
अपना मुखोटा भी आप साथ रखिए…

दुश्मनों की तो जाहिर होती है जलन
अपने दोस्तों पर भी एक निगाह रखिए…

बढ़ा चढ़ा कर कहने का है यहां खूब प्रचलन
आप भी तो अपने मुंह में जुबान रखिए…

गहरी होती है अपनों के जख्मों की चुभन
ज़रा संभल संभल कर आप पांव रखिए….

अपने ही दम पर तय होती डगर कठिन
कुछ खुद पर भी तो एतबार रखिए…

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