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खुद को है

Maneelal Patel मनीभाई

Maneelal Patel मनीभाई

कविता

April 17, 2017

जिन्दगी के हरेक  दंगल में………
…………………लड़ना खुद को है।
…………………भिड़ना खुद को है।
………………….टुटना खुद को है।
………………….जुड़ना खुद को है।

ये वक्त,बेवक्त माँगती हैं कुर्बानियाँ…..
…………………..बिखरना खुद को है।
………………….सिसकना खुद को है।
…………………..संभलना खुद को है।
……………………..उठना खुद को है।

यूँ ही नहीं, कोई इतिहास के पन्नों में …..
…………………………लुटाना खुद को है।
………………………..झोंकना खुद को है।
…………………………तपाना खुद को है।
……………………….निखरना खुद को है।

खुदा के रहमों करम हम बंदों पे सदा से …
………………………समझना खुद को है।
…………………….पहचानना खुद को है।
…………………………मानना खुद को है।
………………………..जानना खुद को है।

(रचयिता :-मनी भाई )

मुझे ना पता, यह कविता है;या कोई साज।
पर इतना समझलो; हैं मेरे दिल के आवाज।

Author
Maneelal Patel मनीभाई
मैंने रोमांटिक मोमेंट पर 1000 गीत लिखे हैं । अब नई कविता, हाईकु और छत्तीसगढ़ी कविता पर अपना मुकाम बनाना चाहता हूँ ।
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