खुद को चोट लगाये कौन —— गज़ल

खुद को चोट लगाये कौन
पत्थर से टकराये कौन

दिल ये नित नित मांगे और
इस दिल को समझाये कौन

सब अपनी दुनिया मे मस्त
इक दूजे के जाये कौन

मार गयी मंहगाई आज
रोटी दाल खिलाये कौन

रंग बदलते रिश्तों को
शीशा रोज दिखाये कौन

ढोंगी साधू संतों से
अपना धर्म बचाये कौन

हक अपने सब मांगें आज
निर्मल फर्ज निभाये कौन

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निर्मला कपिला
निर्मला कपिला
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लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी],... View full profile
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