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” —————————खुद को आज छलेगा ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

June 29, 2017

आज की रचना का मूल आधार बना है –

” Azam Khan’s controversial statement against the Indian Army ‘

राजनीति की चौसर पर यह , कब तक खेल चलेगा !
मनमाने देगा बयान , और नेता हमें तलेगा !!

सीमा पर जो तन मन वारें , उनका मोल न जानें !
देशद्रोह इस देश में आखिर , कब तक यहां पलेगा !!

सोची समझी साजिश रचते , बनते बड़े मसीहा !
देश- दिलों को बांट रहे हैं , सबको यही खलेगा !!

प्रजातंत्र की आड़ में देखो , विषधर खूब पले हैं !
राजनीति के गलियारे में , उनको कौन दलेगा !

सबसे पहले देश हमारा , और उसके रखवारे !
उन पर आंच अगर आयी तो , कुछ भी नहीं टलेगा !!

निंदा के प्रस्तावों से बस , आगे की कुछ सोंचें !
कानूनों की सख्ती से ही , देश का रंग बदलेगा !!

मृत्युदण्ड हो देशद्रोह पर , या फांसी का फंदा !
न्याय तुला पर इससे नीचे , काम नहीं चलेगा !!

देशहितों पर आंच आ रही , खून अगर ना खौले !
हिंदुस्तानी होने का भ्रम , खुद को आज छलेगा !!

बृज व्यास

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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