मुक्तक · Reading time: 1 minute

खिला कण कण

खिला कण कण,पुष्प महके, भ्रमर बहके, आम्र बौर आये
कोयल कूके,पलाश दहके, मलय समीर, रवि मुस्काये
पीताम्बरी नवयौवना धरा, को करके आलिंगनबद्ध
मदन मद मस्त सा कुसुमाकर, झूमकर प्रणय गीत गाये

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