कविता · Reading time: 1 minute

खाली बोटलों सी…

खाली बोतलों से बन के रह गयी हैं अब जिंदगी,
जिसके हाथ लगी बस उसीने गजब ढ़ाया….
.
बड़े अरमानों से बनाया था बनाने वाले ने,
क्या-क्या न किया था मेरे श्रींगार में,
नये नाम नये लेबल से सँजोया था मुझे,
जब तक दुनिया के मतलब से भरी रही,
खूब सँभाला गया मुझे,
खाली जो हुयी गलियोंमें या चौराहों पर मिली,
खाली बोतलों से बन के रह गयी हैं अब जिंदगी…..
.
फिर किसीने रास्ते से उठाया था मुझे,
मुझपर की मिट्टी कर साफ चमकाया था मुझे,
कुछ अपने मतलब की चीज से भरना चाहा था मुझे,
अचानक से फिसली उसके हाथों से और चूर-चूर हो गयी,
उठाकर उसने मुझे अपना दामन बचाकर कुछ ऐसे फेका,
क्यों कि अब तक बहुत क्रूर हो चुकी थी मैं टूटकर,
खाली बोतलों से बन के रह गयी हैं अब जिंदगी…..

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