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खामोश अकसर जब भी मैं रहता हूँ

खामोश अकसर जब भी मैं रहता हूँ।
तुम समझते हो मैं चुप ही रहता हूँ।

हर बार शब्दों का शोर नहीं मुमकिन
इसलिए कभी यूं आँखों से भी कहता हूँ।

ख्वाबों की मलकियत है यूं तो मेरे पास
हकीकत में माना कि तन्हां ही रहता हूँ।

तुम भी न समझे तो कौन अब समझेगा
मैं अपना तुम्हें बस तुम्हें ही समझता हूँ।।।
कामनी गुप्ता ***

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kamni Gupta
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I am kamni gupta from jammu . writing is my hobby. Sanjha sangreh.... Sahodri sopan-2... View full profile
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