कविता · Reading time: 1 minute

खामोशी

कितनी परतें
कितने तह हैं ना
तुम्हारी
आँखों में भी
बातों में भी
कि जैसे तुम
तुम नहीं
कोई और हो
या फिर वो
जिसे देखा था
फिरते हुए सड़कों पर
मनचली सी
वो
तुम नहीं
कोई और थी..
हर रोज
कोई और
हुआ करती हो तुम
कहो ना
कौन हो तुम
ओ खामोशी!
कुछ तो बोलो
ओ खामोशी!
कुछ तो बोलो

3 Likes · 2 Comments · 61 Views
Like
You may also like:
Loading...