झाँसी की रानी /क्षिति पर तूफाँ-सा आया ,तलवार हाथ ले निकल पड़ी

क्षिति पर तूफाँ-सा आया,तलवार हाथ ले निकल पड़ी|
देख फिरंगी की छाती पर, अश्व-टाप धर आज चढी|

सुयश-वीरता खेल खेलती,झाँसी की क्षत्राणी थी
मातृभूमि की जय,जय रानी,बुंदेलों की वाणी थी
अद्भुत तेज,अपार वीर रस, रोम-रोम पर झलक रहा
फँस गया फिरंगी फंदे में मर गया, बचा तो बिलख रहा
देखो विप्लव के कारण, बैरी की सेना, पिछल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी |
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी |
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी |

दत्तक, पृष्ठ भाग पर कस,उत्तर दिश को बढती जाती
निकट कालपी, सेना देखी,अश्व गिरा तब घबड़ाती
रानी नीचे, कांटों से छिद गया सुतन, था हाल बुरा
देख सुअवसर अश्व लिया, छलकी आँखें ना देर जरा
सच कहूँ समय न था तुरंत ,कालपी त्यागी,विकल घड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

आगे बढ़ ,डाकू बरजोरा आया ,औ ललकार उठा
सीमा के अंदर देखा तो निर्दय मद-सिंह दहाड़ उठा
रानी बोली भारतीय क्षत्राणी हूँ, न भेड़ हूँ मैं
तेरी गर्जन से डरूँ न हट, वरना तुझे उधेड़ दूँ मैं
नारी को आँखें दिखलाता, लगता तेरी अकल सड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

पीछे गोरों की सेना के, प्यादे आने वाले हैं
लज्जा खाओ, देश हेतु हम मर-मिट जाने बाले हैं
बरजोरा पानी-पानी हो, बोला, जाओ लड़ता हूँ
गोरी सेना के सम्मुख,स्व छाती खोल के अड़ता हूँ
रानीलक्ष्मीबाई निकली,राष्ट्र-चेतना सबल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

युद्ध लड़ा बरजोरा ने ,छक्के छूटे शासन के
रोते-चिल्लाते गोरे, हिल गए पैर अनुशासन के
सेना आई तत्क्षण घेरा, वीर कहे, जय हिंद देश
तलवार मार ली निज तन में, जय भारत,जय जय स्वदेश
झाँसी -रानी बच जाए, मैं मरूं न दुख ,तब सफल घड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

राम लला मंदिर-फाटक पर ,लक्ष्मीबाई खड़ी हुई
कोंच नगर अति धन्य हुआ, शुभ जयकारों की झड़ी हुई
तब तक गोरों की सेना ने, कोंच -किनारा घेर लिया
हुआ भयंकर युद्ध, जवानों ने, उन सबको ढेर किया
यह क्या ,सेना पुनि से आई, शत्रु-चाल कुछ सबल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

झाँसी -रानी निकल पड़ी, अविरल खूनी संग्राम हुआ
मारा,काटा,रूँदा,घेरा,बैरी डर -आयाम हुआ
रानी ने शौर्य दिखाया तो,गूँज गया विजयी निनाद
तात्या का शुभ संग मिला, हो गया जीत का शंखनाद
फिर इक किला, ग्वालियर का भी,जीता,यह उपलब्धि बड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी

जून ,अठारह सौ अट्ठावन, घेर लिया पुनि रानी को
कोटा की सराई, ग्वालियर,फूलवाग में प्राणी को
मिली वीरगति, अश्रु आ गए ,रामचंद्र रो रहाआज
यह चर्चा आग-सदृश फैली, रोता भारत का समाज
मातृ-सुतल को कर प्रणाम,सुर लोक गई,अति विकल घड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी
क्षिति पर तूफाँ-सा आया,तलवार हाथ ले निकल पड़ी
देख फिरंगी की छाती पर अश्व-टाप धर आज चढी …………………………………………………..
कोटा की सराई=ग्वालियर का फूलवाग क्षेत्र
रामचंद्र =श्री राम चंद्र राव ,रानी लक्ष्मीबाई का अंग रक्षक|
…………………………………………………….
बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
. सूचना
………
1=वर्ष 2013 में जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली से प्रकाशित मेरी कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” ISBN: 978-93-82340-13-3 की रचना को परिष्कृत कर साहित्य पीडिया पर प्रकाशित किया गया है |उक्त रचना के अनुसार पाठक बंधु कृति की रचना को परिष्कृत कर सकते हैं |

Pt Brijesh Nayak
(बृजेश कुमार नायक )
“जागा हिंदुस्तान चाहिए”एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता
16-08-2017

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 2
Views 6.6k

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share