कविता · Reading time: 1 minute

“क्षमता वाला परिणाम”

“क्षमता वाला परिणाम”
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“बेचारे उसका क्या होगा”
जो छुपे रुस्तम होते थे,
हर परीक्षा परिणामों में,
सभी बोर्ड के नतीजों में
अचानक जो टॉपर बनते,
जो दिखते नहीं थे कभी,
घरेलू परीक्षा परिणामों में,
“बेचारे उसका क्या होगा”..

जो सुबह तो कुछ पढ़े नही,
पढ़ते थे वो जरूर शामों में;
बैठते थे पीछे बेंच पर सदा
मगर दिखते आगे नामों में,
जो आगे-पीछे करते नही ,
विद्यालय के किसी कामों में,
“बेचारे उसका क्या होगा”..

जो लाडले बन पाए थे नहीं,
खुद गुरु के हर फरमानों में,
जो जाते थे कम ही स्कूल,
उसके घर की यही उसूल,
या इम्यूनिटी थी कमजोर,
मगर बच्चा था वो बेजोड़,
“बेचारे उसका क्या होगा”..

कभी रही हो कुछ उलझन,
या रही हो कुछ परेशानी,
शुरुआत में जो पढ़ा नही,
थी,अंत में पढ़ने की ठानी;
इस परिणाम ने तो कर दी,
बेचारे के साथ, बड़ा नादानी;
“बेचारे उसका क्या होगा”..

यहां सरकारी तो पीछे रहा,
पब्लिक ने ही बाजी मारी,
इसको क्या कहें अब वो,
इम्यूनिटी बेस्ड रिजल्ट या,
कोरोना परीक्षा परिणाम,
या कोई नतीजे की दुकान,
या क्षमता वाला परिणाम।
“बेचारे उसका क्या होगा”..
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स्वरचित
…..✍️ पंकज “कर्ण”
………….कटिहार।।

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