क्षणिक ख़ुशी-

ऐसा क्या हुआ आज मेरे संग,
क्यों आज मैं इतनी खुश हूं।
मुझको मिली जीवन की डगर,
यूं आज मैं इतनी खुश हूं।
कब से मन यह तरस रहा था एक खुशी की झलक को।
हरपल सावन बरस रहा था भीगी रहीं पलक तो।
भीगी पलकों को मिला है आज बसन्त,
यूं आज मैं इतनी खुश हूं।
मेरी इन आंखों को बचपन के प्यारे दिन, जिनकी अक्सर तलाश थी।
इनको मिली भटकी जवानी ये यूं अक्सर उदास थी।
बचपन मिला मुझे शिशुओं के संग,
यूं आज मैं इतनी खुश हूं।
ज़िन्दगी की राहों में मेरा मन अकेला था।
हर कदम पर धोखेबाजी और ठगों का मेला था।
रेखा को मिला हारी ज़िंदगी का साहिल, यूं आज मैं इतनी खुश हूं।

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