कविता · Reading time: 1 minute

“क्षणिका”

“क्षणिका”
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अन्जान राहों का मुसाफ़िर हूँ
न राह कटी
न ज़िंदगी,
पहुँचेंगे कहीं तो,
कटे कटे,
खरामा खरामा*।
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राजेश”ललित”शर्मा
२८-१-२०१७
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खरामा:-धीरे धीरे

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