क्षणिकाएँ

(1)
मानव-जीवन ,
ज्यों-सरिता है।
आँसू त्यों-
पूरी कविता है।
(2)
मानव-जीवन सागर है ।
भरी ज्ञान की गागर है।
गोता लेते गोता-खोर ।
बाकी चोरी करते चोर ।
(3)
आँसू समझो
धर्म-ग्रंथ है।
प्रेम ही केवल,
एक पंथ है।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी
कवि एवं शिक्षक।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 827

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share