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“क्षणिका”

राजेश

राजेश"ललित" शर्मा

कविता

January 5, 2017

“क्षणिका”
———————-
अब नहीं ,
बोलूंगा कभी,
सत् ।
खुल जायेगा,
झूठ सारा,
परत दर परत।
————————-
राजेश”ललित”शर्मा
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Author
राजेश
मैंने हिंदी को अपनी माँ की वजह से अपनाया,वह हिंदी अध्यापिका थीं।हिंदी साहित्य के प्रति उनकी रुचि ने मुझे प्रेरणा दी।मैंने लगभग सभी विश्व के और भारत के मूर्धन्य साहित्यकारों को पढ़ा और अचानक ही एक दिन भाव उमड़े और... Read more
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