कविता · Reading time: 1 minute

क्षणिका

क्षणिका
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(1)
कब अबला बनी रहोगी
अपनी शक्ति को
पहचानो,
दुश्मन खुद ब खुद
बेबस हो जायेगा।
(2)
शक्ति का दुरूपयोग
भारी पड़ जायेगा,
संभल जाओ
अन्याय मत करो
बहुत पछताओगे।
■सुधीर श्रीवास्तव

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