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क्षणिकाएँ

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

कविता

June 1, 2017

क्षणिकाएँ
“बात”
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कौन कहता है
तन्हाई अकेली
और खामोशी मौन होती है?
जब मिल बैठती हैं
एक साथ तो
बात ही बात होती है।

“सूनापन”
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मन व्यथित हो उठा
पाकर तन्हाई में
अँधेरा जीवन
कितनी बेचैनी, दर्द
और सूनापन।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका- साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी। (मो.-9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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