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क्षणभंगुर …

sushil sarna

sushil sarna

मुक्तक

August 5, 2017

क्षणभंगुर …

क्षणभंगुर इस जीवन का कहाँ कोई ठिकाना है l
हर कदम पे उलझन में लिपटा एक फ़साना है l
हो सका न मुक्त कभी आदि , अंत की कैद से ,
आना-जाना साँसों का इस तन में एक बहाना हैll

सुशील सरना

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Author
sushil sarna
I,sushil sarna, resident of Jaipur , I am very simple,emotional,transparent and of-course poetry loving person. Passion of poetry., Hamsafar, Paavni,Akshron ke ot se, Shubhastu are my/joint poetry books.Poetry is my passionrn

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