कविता · Reading time: 1 minute

क्रोध

कोर्धावेश में किसी का बिगड़ जाए,
अपेतु , बात तेरा ही बिगड़ जायेगा।
कोर्धित से मत कर मुका- लत ,
नहीं तो होगी तेरी मुस्कुराहट कुर्बान ।
प्रतिघात की बनी वजह छोड़,
अनुराग की भावना पकड़।
रोष प्रदर्शन करने का अधिकार,
वैसा नहीं है किसी से लग लगाव।
रोष का नुर मत आने दो चेहरा पर,
लग जाएं ग्रहण तेरे भी नूरे में ।
घृणा चकी पिसा इंसान की कोप,
सेहत से करता खिलवाड़।
करो गुस्सा पर आपना संयम,
जीवन मै पाओ स्नेह अपार।।

गौतम साव

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