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क्रोध पर विजय

Mar 28, 2020 11:11 AM

महात्मा बुद्ध का शिष्य पूर्ण उनके पास पहुंचकर हाथ जोङते हुए बोला, भगवान्, मै साधना -अध्ययन से ऊब गया हूँ । अब मै आपकी आज्ञा से सूनापरांत जनपद मे धर्म प्रचारार्थ भ्रमण करना चाहता हूँ । बुद्ध बोले वहां के लोगो का स्वभाव बहुत कठोर है ।यदि उन्होने तुम्हारे प्रति कठोर वचनो का प्रयोग किया तो, क्या करोगे ? पूर्ण ने कहा भंते, मै सोचूंगा कि इस क्षेत्र के लोग बहुत भले है, केवल कठोर वचनो का प्रयोग करते है मारते नही । बुद्ध ने कहा, अगर उनमे से किसी ने तुम्हे थप्पड़ मार दिया, तो ? भंते मै उन्हे इसलिए भला समझूंगा कि वे लाठी डण्डे के जगह केवल थप्पड़ ही मारते है । बुद्ध ने सवाल किया, अगर किसी ने थप्पड़ के जगह डण्डे से प्रहार किया, तब क्या समझोगे ? पूर्ण ने कहा, भगवन, मै समझूंगा किस्से उन्होने डंडा ही तो मारा है, दस्युओ के लिए मेरे प्राण तो नही लिए । अब बुद्ध का अंतिम प्रश्न था, पूर्ण यदि तुम्हे कोई ज्यादा क्रूर व्यक्ति मिल जाए और शस्त्र से वार कर तुम्हारे प्राण लेने की कोशिश करे, तब तुम उसके बारे मे क्या धारणा बनाओगे ? पूर्ण ने जवाब दिया तब मैं सोचूंगा कि वह व्यक्ति मुझे जीवन मुक्त कर मुझ पर एहसान कर रहा है । पूर्ण के उत्तर सुन बुद्ध समझ गए कि उसने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है । वहां पूर्ण को जाने की अनुमति दे दी ।

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Rj Anand Prajapati
Rj Anand Prajapati
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