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क्रांतिकारी मुक्तक

naman jain naman

naman jain naman

मुक्तक

December 4, 2016

बहर- *१२२२ १२२२ १२२२ १२२२*

कभी अंग्रेज़ का हमला, कभी अपने पड़े भारी।
कभी तोड़ा वतन को भी, कभी गद्दार से यारी।
कलम का क्रांतिकारी हूँ, यही सब आग लिखता हूँ,
नमन शोला उगलता है, कलम संगीन-सी प्यारी।

नमन जैन नमन

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naman jain naman
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