क्यो परदेशी होती हैं बिटिया

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया,
क्यों परदेशी होती है बिटिया?

पिता आँगन जो फूल सी खिलती,
महक ले जाती दूसरी बगिया।
बाबुल आँगना से कोसों दूर,
बसती है उसकी असली दुनिया।

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया,
क्यों परदेशी होती है बिटिया?

भूल ना जाना, याद ना आना,
बाबुल तेरी नन्ही सी गुड़िया।
जो संग-संग हँसती गाती थी,
मैं थी तेरी जादू की पुड़िया।

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया,
क्यों परदेशी होती है बिटिया?

खोल कही कोई ले जायेगा,
तेरे खूंटे बँधी इक गईया।
ये कैसा भाग्य दी है विधाता,
ये कैसी रीत बनायी दुनिया।

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया,
क्यों परदेशी होती है बिटिया?

ये घर आँगन तो छूट रहा है,
मन में मेरे कुछ टूट रहा है।
आज ये कैसी आ गई घड़ियां
नीर से भर आई है आँखिया।

बाबुल के आँगन की इक चिड़िया,
क्यों परदेशी होती है बिटिया?
—लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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