क्यों… (मुअद्दस मुसल्सल ग़ज़ल)

माना के बदलाव के लिये बदलाव का होना जरुरी है !
पर क्यों इसमें आमजन को ही फ़ना होना जरूरी है !!
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क्यों नही जलते शोलो में हाथ आग लगाने वालो के !
क्यों हरबार किसान मजदूर को जान खोना जरुरी है !!
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धनपति उड़ा रहे नोट कागज़ की माफिक शादियों में
क्यों गरीब की बेटी को ही सन्ताप में रोना जरुरी है !!
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नहीं देखा किसी ख़ास वर्ग को मुफलिसी में जीते हुए !
क्यों तुझे और मुझे ही कतार में खड़ा होना जरुरी है !!
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इरादा नही “धर्म” का दोष दे किसी को सुकर्म के लिये
बस इल्तिज़ा ये,भागीदारी सबकी “सम” होना जरुरी है !!
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डी. के. निवातिया _________!!!

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