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क्यों… (मुअद्दस मुसल्सल ग़ज़ल)

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

गज़ल/गीतिका

December 6, 2016

माना के बदलाव के लिये बदलाव का होना जरुरी है !
पर क्यों इसमें आमजन को ही फ़ना होना जरूरी है !!
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क्यों नही जलते शोलो में हाथ आग लगाने वालो के !
क्यों हरबार किसान मजदूर को जान खोना जरुरी है !!
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धनपति उड़ा रहे नोट कागज़ की माफिक शादियों में
क्यों गरीब की बेटी को ही सन्ताप में रोना जरुरी है !!
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नहीं देखा किसी ख़ास वर्ग को मुफलिसी में जीते हुए !
क्यों तुझे और मुझे ही कतार में खड़ा होना जरुरी है !!
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इरादा नही “धर्म” का दोष दे किसी को सुकर्म के लिये
बस इल्तिज़ा ये,भागीदारी सबकी “सम” होना जरुरी है !!
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डी. के. निवातिया _________!!!

Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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