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क्यू तुमने मुँह फेर लिया

Rashmi Singh

Rashmi Singh

कविता

January 29, 2017

सर्द रात
जब तुम
असहाय पीड़ा में थी
मेरी किलकारी
ने
तुम्हारे सारे दर्द को
भुला दिया था
और तुम मुस्कुराते
हुए बोली थी
तुम मेरा
अक्स हो
और मैं झिलमिलाती हुई
बढ़ रही थी
फिर
उस रात जब
तुम्हारा अक्स
दुबारा आया
तो तुमने भी मुँह फेर लिया
और कह ही दिया
मेरा कलंक आया आज जमी पर
माँ फिर तुम भी बदलने लगी
कारन कौन था माँ
मैं या
घर समाज का वो ताना
जिसने तुमसे
तुम्हारी ही ममता को
कलंक कहला डाला
माँ मैं आज भी वही हूँ
तुम्हारा अक्स
फिर तुम क्यू आज बन
गई माँ से एक सोच का अक्स?

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Author
Rashmi Singh

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