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क्यूँ रंग बिखरा देख दिल सफाई देता है…

CM Sharma

CM Sharma

गज़ल/गीतिका

February 27, 2017

धुंआ धुंआ सा ये शहर दिखाई देता है…..
हरेक शख्स ही जिस्म की दुहाई देता है……

हरेक बात में चर्चा था मेरे इश्क़ का यहाँ….
क्यूँ आज गुमसुम मौसम दिखाई देता है….

उड़ा फिरा किया हरदम जो वक़्त से आगे….
वही ज़मीं पे अब फिसलता दिखाई देता है….

उसने मांगी थी दो वक़्त की रोटी लेकिन….
शहर का शहर ये भूखा दिखाई देता है….

गर न तेरा लहू है न मेरा ‘चन्दर’….
क्यूँ रंग बिखरा देख दिल सफाई देता है…

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Author
CM Sharma
उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की पर औरों की भी सुनता हूँ.....

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