क्युं

ये खामोशियाँ अक्सर
बदजुबां सी लगतीं हैं ।
ज़िस्म के साथ क्युं ,
परछाइयाँ गुजरतीं हैं ।
…. विवेक दुबे”निश्चल”@…

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