Nov 26, 2018 · कविता
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क्या होती है माँ !!

मैं कैसे करूँ बयां !

क्या होती है माँ ?

मेरा तो सारा जहाँ|

है बस मेरी माँ ||

धूप अगर लग जाये तो |

आँचल फैला ,दे छाया माँ ||

मुझे दर्द में देख कर |

जग से लड़ जाये मेरी माँ ||

सागर भर के शब्द लगाकर |

जो ममता ,अंकित कर पाऊँ ना ||

यदि गागर में सागर भर भी दूँ |

तब भी ,प्रेम तेरा लिख पाऊँ ना ||

कैसे समझाऊँ मैं ,जग को माँ |

ऐसा क्या लिख जाऊँ, माँ ||

मैं कैसे करूँ बयां !

क्या होती है माँ ?

मेरा तो सारा जहाँ|

है बस मेरी माँ ||

अंकित रस्तोगी
गोला गोकर्णनाथ खीरी

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Ankit Rastogi
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